Wednesday, 11 April 2018

24 वीं पुण्यतिथि पर पिताजी के चरणों में हमारा शत -शत नमन। आपका स्नेह और आशीर्वाद हम पर हमेशा बना रहे।

[परम पूजनीय पिता स्व. चौ .राम लाल जी भाटिया ]

                 आज से चौबीस  वर्ष पूर्व 12 अप्रैल ,1995 को आप बेशक भौतिक रूप से हमसे दूर चले गए , परन्तु हमारे मन -मस्तिष्क मे  बसी आपकी अमिट मधुर स्मृतियाँ समय -समय पर मुझे इस बात का अहसास कराती रहती हैं कि आप  हमसे अलग होकर कहीं भी नहीं गए अपितु आप आज भी हमारे साथ ही हैं। जब कभी -भी किसी ऐसी विपत्ति ने मुझे घेरा जिसमें आपके मार्गदर्शन या सहयोग की आवश्यकता  महसूस हुई तो आपने अदृश्य रूप में उस उलझन से निकलने का  मार्गदर्शन देकर अपने  पिताधर्म को निभाया।आपके द्वारा अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध  संघर्ष करने के बताए गए मार्ग पर मैं आज भी चल रहा हूँ । हम आज आपकी 24 वीं पुण्यतिथि पर आपके चरणों में अपना  शत -शत नमन करते हैं और आपसे यही प्रार्थना करते हैं  कि आप अपना स्नेह और आशीर्वाद हमारे पुरे परिवार पर हमेशा बनाये रखें।                                          

                     आपने हमेशा यही कहा  कि 'विरोधी चाहे कितना भी शक्तिशाली और प्रभावशाली क्यों न हो अगर हमारे पास सच्चाई और अपने बड़े -बजुर्गों का आशीर्वाद है तो जीत हमें ही मिलनी तय है,'आपकी इसी सीख के कारण मैं  भी समाज के पीड़ित वर्ग के  कमजोर और असहाय व्यक्ति के साथ चट्टान की तरह खड़ा होकर उसकी पीड़ा को मुखर वाणी देकर सत्ता के शीर्ष पर बैठे शासकों तक पहुंचाकर उसकी समस्या का निदान करवाकर ही दम लेता हूँ और आपके आशीर्वाद से जीत हमेशा मेरे साथ आ खड़ी होती है। मेरी आपसे और ईश्वर से यही कामना है कि आपके  स्नेह और आशीर्वाद की छत्रछाया सदैव हम पर बनी रहेगी। मैं आज भी आपके द्वारा दी गई जनहित में कार्य करने प्रेरणा के कारण ही  चौ. रामलाल भाटिया चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से समाज के पिछड़े और कमजोर वर्ग के लोगों के हित में कार्य करने को अपना परम् सौभाग्य मानता हूँ। आपके चरणों में हम सदैव नतमस्तक रहेंगे,और आपके दिखाए रस्ते पर चलकर जीवन व्यतीत करने को ही अपना क्षत्रिय धर्म-कर्म मानते हैं। आपका स्नेह और आशीर्वाद हम पर हमेशा बना रहे। 

Wednesday, 4 April 2018

ओलम्पिक गेम में स्वर्ण पदक जीतना ही मेरा सपना -हैटट्रिक मेन रैसलर हरप्रीत सिंह संधू

               भारत के पहलवानो ने कुश्ती में अपना परचम हमेशा से ही पूरी दुनिया में फहराया है। कुश्ती हमारे देश की संस्कृति में रचा -बसा खेल है जो आदि काल से ही हमारे ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।इस भारतीय खेल को जितना प्रोत्साहन सरकारों द्वारा दिया जा रहा है अगर उसको और अधिक बढ़ा दिया जाये तो हमारे पहलवानों ने विश्व स्तरीय मुकाबले में और अच्छे परिणाम आ सकते हैं। हमारे देश में जितनी लोकप्रियता और सरकारी /गैर सरकारी प्रोत्साहन विदेशी खेल क्रिकेट को मिला है अगर उसका आधा भी हमारे पारम्परिक खेलों -कुश्ती ,कबड्डी और हॉकी को मिलता तो खेल की दुनिया में भारत का नाम सबसे ऊँचा हो सकता था। 

                        कुश्ती  में पंजाब के पहलवानो का दबदबा हमेशा से ही रहा है। 1966 में पंजाब से अलग हुए हरियाणा ने भी इस खेल में आना लोहा पूरी दुनिया से मनवाया है। पंजाब के संगरूर जिले की मूनक तहसील के गांव कडैल के एक किसान परिवार में सन 1993 में जन्मे हरप्रीत सिंह संधू ने कुश्ती में अपनी योग्यता और मेहनत से भारत का नाम कई बार रोशन किया है। हरप्रीत ने एशियाई चैम्पियनशिप मुकाबले में लगातार तीसरी बार कांस्य पदक जीतकर अपना और भारत का दबदबा कायम रखा है। आज रैस्लिंग की विश्व रैंकिंग में हरप्रीत संधू का चौथा स्थान है।  सजगवार्ता डॉट कॉम प्रतिनिधि अश्विनी भाटिया ने हरप्रीत सिंह संधू से एक मुलकात कर विस्तृत बातचीत की। हरप्रीत के दादा श्री बलवंत सिंह जी भी अपने समय के नामी पहलवांन थे और पिता श्री लक्ष्मण सिंह कबड्डी के खिलाडी रह चुके हैं। इस तरह से हम कह सकते हैं कि हरप्रीत को खेल का जूनून उनके खून से ही मिला है। पंजाब से ही स्नातक की पढ़ाई करनेवाले हरप्रीत इस समय पंजाब पुलिस में सब -इंस्पैक्टर के पद पर आसीन हैं। कुश्ती में हरप्रीत के विश्व स्तर पर अब तक के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए पंजाब सरकार को अविलम्ब उन्हें पुलिस उप अधीक्षक पद पर प्रौन्नति देनी चाहिए। ज्ञात हो कि लगातार तीसरी बार पदक जितने का रिकार्ड भी हरप्रीत के नाम ही है इससे पहले भारत के किसी भी दूसरे पहलवान ने यह करिश्मा नहीं किया है। हरप्रीत बचपन से ही अखाड़े में अपना पसीना बहाने लगे थे और अपनी पढ़ाई के साथ -साथ कुश्ती के भी नए -2 दाव पेच सीखते रहे। 

हरप्रीत ने छात्र जीवन के दौरान ही कई कुश्तियों में विजय हांसिल की और उनका नाम बड़े पहलवानों में शामिल हो गया। इनको सन 2008 पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में विदेशी पहलवानों से लड़ने का अवसर मिला जिसमें उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा। इसके बाद वह  2009 में सब जूनियर ऐशियन कप के 85 किलो वर्ग के मुकाबले में उतरे और उनको सिल्वर मेडल मिला। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने उनको रेलवे में सर्विस प्रदान कर दी और 2 वर्ष तक यहां रहने के बाद हरप्रीत को पंजाब सरकार ने 2017 में पंजाब पुलिस में एस आई के पद पर नियुक्ति दे दी। तब से वह राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धायों में पंजाब पुलिस का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।
                        हरप्रीत कहते हैं कि कुश्ती के लिए शरीर और मस्तिष्क दोनों का स्वस्थ होने के साथ -साथ दोनों का आपसी तालमेल होना भी बहुत अनिवार्य 
होता है। पहलवानॉ के लिए अच्छी और पौष्टिक खुराक के साथ ही अच्छे मार्गदर्शन का होना भी जरूरी है। इसके साथ ही सरकार से भी पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि भी समय -समय पर मिलती रहे ताकि वह मुकाबले में अपने विरोधी को धूल चटा सके। ऐशियन चैम्पियन कुश्ती में पिछली तीन बार से लगातार हरप्रीत तीसरे स्थान पर काबिज हैं।पहली बार उन्होंने थाईलैंड में एशियन चैमियनशिप , दूसरी बार दिल्ली में और अब तीसरी बार किर्गिस्तान में एशियन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपनी हैटट्रिक बनाई।हैटट्रिक का रिकार्ड भी हरप्रित के नाम ही है।हरप्रीत ने 2 बार कॉमन वेल्थ गेम चैम्पियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीते हैं। पहला सन 2016 में सिंगापुर कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में और दूसरा 2017 में साऊथ अफ्रीका कॉमनवेल्थ गेम चैम्पियनशिप में कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को सम्मान दिलाया है।     

          हरप्रीत भी इस बात को मानते हैं कि हमारे देश में लोगों का क्रिकेट की ओर अधिक रुझान है। इसी कारण बड़ी -बड़ी कंपनियां भी क्रिकेट को प्रोत्साहित करती हैं और आर्थिक मदद भी करती हैं जबकि हमारे परम्परागत खेल इस प्रोत्साहन से वंचित हैं। इनका कहना है कि अगर कुश्ती जैसे खेलों को क्रिकेट की तरह बड़े प्रायोजक मिल जाएँ तो हमारे खिलाडी विश्व पटल पर भारत का डंका बजा सकते हैं। हमारे देश के खिलाडी हर प्राकृतिक वातारवरण में अपना अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि उनका भविष्य में क्या करने का इरादा है तो वह बड़े गंभीर होकर बोले कि उनका सारा ध्यान 2020 में होनेवाले ओलम्पिक खेलों में पदक जीतकर भारत का नाम विश्व ने ऊँचा करना है और वह दिन -रात अपने इसी टारगेट को पाने के लिए जी -तोड़ मेहनत करने में लगे हुए हैं। 
                   हरप्रीत का कहना है कि भारत के खिलाडियों को विष के दूसरे देशों के खिलाडियों के मुकाबले बेशक कम सुविधाएँ मिलती हैं पर हमारा हौंसला उनसे कहीं अधिक है। उन्होंने इस केंद्र सरकार की नई खेल टॉप नीति को खेलों के प्रोत्साहन के लिए अच्छा बताया है। इस नीति के तहत हर खेल से लगभग 152 शीर्ष खिलाडियों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें से प्रत्येक को हर महीने 50 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय की ओर से दी जा रही है। यह सौभाग्य की बात है कि प्रोत्साहन पानेवाले इन खिलाडियों में कुश्ती से हरप्रीत सिंह संधू का नाम भी शामिल है। हरप्रीत आज के नौजवान लोगों से यह कहना चाहते हैं कि उनको बेकार की बातों को छोड़कर खेलों की ओर ध्यान देना चाहिए इससे एक तो वह स्वस्थ भी रहेंगे और वह गलत व्यसनों से भी बचे रहेंगे। 

                 जब उनसे यह पूछा गया कि उनके साथ ही किर्गिस्तान में हुई एशियन चैम्पियनशिप में पदक जीतनेवाली महिला रैसलर नवजोत कौर को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने 5 लाख रूपये के पुरस्कार के साथ पुलिस में डी एस पी पद दिया ,इस पर वह क्या सोचते हैं ? तो उन्होंने इस प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि पंजाब सरकार का यह अच्छा सराहनीय कदम है और वह खुद भी यही अपेक्षा कैप्टन साहब से करते हैं कि उन्हें भी डी एस पी पद पर प्रौन्नति दे दें तो मुझे अति प्रसन्नता होगी। इस प्रोत्साहन से वह स्वयं को ओलम्पिक चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से अधिक मजबूती से तैयार हो पाएंगे। अंत में श्री हरप्रीत संधू ने कहा कि सरकार की ओर से खिलाडियों को दी जा रही सुविधाओं से अच्छे ख़िलाडी उभारने और खेलों का स्तर सुधारने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि खिलाडियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि ,पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि समय -समय पर पर्याप्त मात्रा में मिलने से खिलाडियों का मनोबल बढ़ेगा और खेलों में भारत का नाम भी और अधिक चमकेगा। 

Saturday, 24 March 2018

उ,दिननि ठेकेदारों की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करेगा- तिलक राज कटारिया

             दिल्ली (अ. भा.) उत्तरी दिल्ली नगर निगम अपने नागरिकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में अब कोई भी बाधा नहीं आने देगा। यह आश्वासन स्थायी समिति के अध्यक्ष तिलक राज कटारिया ने निगम मुख्यालय सिविक सेंटर में निगम ठेकेदारों के साथ एक बैठक के बाद कही। श्री कटारिया ने कहा कि पिछले लम्बे समय से वित्तीय संकट के कारण निगम के ठेकेदारों के किये गए काम का भुगतान न होने के कारण विकास कार्य भी अवरुद्ध हुए पड़े थे।इससे जनता को भी नागरिक सुविधाओं से वंचित होना पद रहा था। 

              उन्होंने बताया कि ठेकेदारों का उत्तरी दिल्ली नगर निगम पर 450 करोड़ रुपया बकाया है जिसको शीघ्र चुकता किये जाने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने बताया कि 50 करोड़ रूपये की राशि ठेकेदारों को भुगतान हेतु जारी की जा रही है। कटारिया ने कहा कि ठेकेदार निगम जैसे स्थानीय निकाय का एक महत्वपूर्ण अंग है जिनके बिना नागरिक  सुविधाओं को उपलब्ध नहीं करवाया जा सकता और ठेकेदारों की परेशानी को वह भलिभांति समझ सकते है। उन्होंने सभी ठेकेदारों से यह अपील भी की कि वे लोग अब निगम के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में जी जान से जुट जाएँ ताकि जनता को सभी नागरिक सुविधाओं को अविलम्ब उपलब्ध करवाया जा सके। बैठक में उपस्थित ठेकेदारों ने भी उन्हें इस बात का आश्वासन दिया कि वे विकास के काम को पूरा करने में कोई कोताही नहीं बरतेंगे और निगम प्रशासको के विश्वास पर खरे उतरेंगे। इस बैठक में अतिरिक्त आयुक्त सुश्री रेनू जगदेव ,अतिरिक्त आयुक्त श्री एस के भंडारी भी उपस्थित थे। श्री कटारिया ने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम अपने नारिकों को सभी आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध करवाने के लिए कटिबद्ध है और वह हर सम्भव इसको पूरा करने के लिए प्रयासरत रहेंगे। 

Thursday, 22 March 2018

कामयाबी हेतु लग्न और कड़ी मेहनत के साथ -साथ टैलेंट भी होना जरूरी है -मॉडल सुमित शर्मा

                      आज युवाओं में एक्टिंग और मॉडलिंग में अपना कैरियर बनाने का जनून सिर चढ़ कर बोल रहा है। इस क्षेत्र में नाम के साथ -साथ पैसा भी कमाया जा सकता है। यही कारण है कि आज का युवा इस फिल्ड में अपनी किस्मत आजमाने के लिए पुरे जोश -खरोश से अपने कदम बढ़ा रहे हैं। क अच्छे मॉडल के लिए खूबसूरत चेहरे के साथ -साथ कसरती शरीर और टैलेंट का होना भी बहुत जरूरी है होता है।अधिकांश मॉडल यही चाहते हैं कि वह भी फ़िल्मी दुनिया में प्रवेश पाकर शिखर पर पहुंचे और लोगों में उनकी एक अलग पहचान बने। इनमें से कुछ ही भाग्यशाली लोग होते हैं जो अपने बड़े सपने साकार करने में कामयाब हो पाते हैं। 

                लुधियाना (पंजाब ) के  सुमित शर्मा भी मॉडलिंग की दुनिया में एक उभरता स्टार है।अभी कुछ दिन पूर्व ही  सजग वार्ता डॉट कॉम प्रतिनिधि अश्विनी भाटिया से हुई एक मुलाकात में उनके कैरियर से लेकर उनके जीवन से जुडी कई बातों की जानकारी भी मिली। यहां उसी बातचीत के कुछ अंश प्रस्तुत हैं ;    सन 2005 में मॉडलिंग से अपने अभिनय की शुरुआत करनेवाले सुमित का जन्म लुधियाना में 1987 को लुधियाना के मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ और यहीं के एस सी डी गर्वनमेंट कालेज से अपनी शिक्षा -दीक्षा भी पूर्ण की। सुमित को भगवान ने एक सूंदर और आकर्षक चेहरा प्रदान किया। एक ऊँची -लम्बी  कद -काठी वाले पंजाबी गबरू सुमित को जिम से भी गहरा लगाव है इसीलिए वह किसी बॉडी बिल्डर से कम नहीं दीखते है। स्नातक तक की शिक्षा ग्रहण करनेवाले सुमित अब तक लगभग 150 पंजाबी गानों का वीडियो निर्देशन  भी कर चुके हैं। कुछ गानों को उन पर फिल्माया भी गया है। वर्ष 2007 में सुमित को पहली बार एक मॉडल के रूप में पंजाबी गाने की रिकार्डिंग में दर्शकों के सामने अपनी अभिनय को प्रस्तुत करने का मौका मिला। इस गाने को काफी लोकप्रियता मिली और सुमित को भी एक नई पहचान भी मिली। 

              सुमित ने बताया कि उन्होंने पिछले 10 वर्षों में उनको कड़ी मेहनत के साथ ही संघर्ष भी करना पड़ा। आज वो जिस स्थान पर हैं उसके लिए अपने सपने को साकार करने के लिए उन्हें लग्न के साथ एकाग्रता की भी सहायता मिली है। उनसे जब यह पूछा गया कि पंजाबी गानों में कई लोग यह आरोप भी लगते हैं कि उसमें फूहड़ता का समावेश बढ़ता जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ गानों में हो सकता है परन्तु पंजाब संगीत को पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है। 

          वह कहते हैं कि जो लोग पंजाबी भाषा नहीं जानते वो भी पंजाबी गानों पर झूमते देखे जा सकते हैं। पंजाबी संगीत बहुत हद तक लोगों को थिरकने को मजबूर करता है ,इससे हम पंजाबी सभ्यता ,संस्कृति और संगीत की महत्ता को आसानी से समझ सकते हैं। पंजाबी फिल्मों का भविष्य उज्ज्वल है और बड़ी संख्या में आज पंजाबी फिल्मों का निर्माण भी हो रहा है जिनमें समाजिक मुद्दों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है और दर्शक भी उनको पसंद कर रहे हैं। 

       सुमित कहते हैं कि उन्होंने अपने मॉडलिंग के शरू के दिनों में कई प्रिंट फोटो शूट , रैम्प शो और ऐड फिल्मों में काम किया है। इस दौरान उनकी अभिनय क्षमता और प्रस्तुति को दर्शकों ने काफी सराहना मिली। 2011 से सुमित वीडियो निर्देशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। सुमित कहते हैं कि अब उनका अगला पड़ाव मुंबई की फ़िल्मी दुनिया में प्रवेश करना है। उनसे कई निर्माताओं की बातचीत चल रही है और शीघ्र ही उनको किसी अच्छी फिल्म में लिये जाने की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि उनको पहले भी कुछ निर्माताओं से फिल्मों में काम करने के प्रस्ताव तो मिले लेकिन उनको जिस भूमिका के लिए ऑफर मिले वह उनके टेस्ट के अनुसार न होने के कारण स्वीकार नहीं किये जा सके। उन्होंने अंत में बताया कि उनका सपना यही है कि वह अभिनय के साथ ही निर्देशन में भी एक अच्छा काम करके लोगों को दिखा सकें। वह विडिओ निर्देशक से फिल्म निर्देशक की यात्रा को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत और लग्न से जुटे हुए हैं और उनको पूरा विश्वास भी है कि अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे। 

 

  

Sunday, 18 February 2018

कुश्ती के साथ -साथ छोटे पर्दे पर भी खास मुकाम बना रहे हैं पवन दलाल

आज कुश्ती के क्षेत्र में भारत विश्व पटल पर एक ऊँचा मुकाम रखता है। कुश्ती और बॉक्सिंग में हरियाणा -पंजाब के खिलाडियों ने देश को एशियाई और ओलम्पिक खेलों में मैडल जीतकर भारत की प्रतिष्ठा को बचाया है। हरियाणा में हर छोटे -बड़े गांव की मिट्टी में पहलवान तैयार किये जा रहे हैं और सरकार भी इस ओर आर्थिक मदद देकर खिलाडियों को प्रोत्साहन देने में लगी हुयी है। 

कुश्ती में हरियाणा के झझर जिले के  इक छोटे से गांव से संबंध रखनेवाले पहलवान पवन दलाल का नाम भी आज उभरते खिलाडियों में लिया जा सकता है। पवन ने सजगवार्ता डॉट कॉम प्रतिनिधि से एक मुलाकात के दौरान बताया कि बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। किसान परिवार से संबंध होने के कारण उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी कोई ज्यादा अच्छी नहीं थी लेकिन उनके चाचा पहलवान रमेश दलाल ने उनको कुश्ती के लिए प्रोत्साहित किया और आज वो जिस मुकाम पर भी हैं उसके लिए उनके चाचा का विशेष योगदान है। वर्तमान में पवन दलाल हिन्द केसरी सोनू पहलवान [मन्डोथी ]जी के पास प्रैक्टिस करके कुश्ती के नए दांव -पेच सीख रहे हैं। 

भारत में कुश्ती का चलन आदि काल से चलता आ रहा है और पहलवानों  का समाज में एक अलग पहचान और प्रभाव भी रहा है। भारत के परंरागत खेलों में कुश्ती सबसे लोकप्रिय खेल रहा है। देश के ग्रामीण क्षेत्रो में कुश्ती या दंगल जीवन का अहम हिस्सा रहा है। पिछले कुछ दशकों में क्रिकेट ने भारतीय खेलों को पीछे छोड़ दिया और गांवों में भी छोटे -छोटे बच्चे भी बैट बॉल लेकर क्रिकेट खेलते नजर आते थे। क्रिकेट का जनून भारतीयों के सिर पर चढ़ कर ऐसा बोलने लगा कि सरकार ,खेल संगठन और जनता सभी का ध्यान सिर्फ इस विदेशी खेल क्रिकेट की ओर ही लग गया। हद तो तब हो गयी जब बड़ी -बड़ी कंपनियां भी क्रिकेट मैचों को ही प्रायोजक बनकर आर्थिक मदद पहुंचाने लगी। क्रिकेट प्रेम के चक्कर में भारतीय खेलों की उपेक्षा होने लगी और अंतराष्ट्रीय मुकाबलों में पदक तालिका में भारत सबसे निचले पायदान पर जा पहुंचा। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाला देश जब खेलों में पिछड़ गया तो ऐसे समय में कुश्ती ने ही भारत की लाज बचाई और फिर सरकार और दूसरे लोगों का ध्यान भी भारतीय पारम्परिक खेलों- कुश्ती -कब्बडी -हॉकी -खो-खो आदि की ओर भी जाना शुरू हुआ। 

 पहलवान पवन कुश्ती में नाम कमाने के साथ -साथ छोटे पर्दे पर भी अपना हुनर दिखाकर अपनी पहचान बनाने में लगे हुए हैं। अच्छी कद -काठी और कसरती शरीर के साथ -साथ आकर्षक चेहरा भी पवन को एक अलग पहचान दिलाने में कारगर सिद्ध हो रहा है। पवन क मराठी सीरियल में भी काम कर रहे हैं और इस  मराठी सीरियल तूजात  जीव रंगला के लगभग  12 एपिसोड जी -मराठी चैनल पर प्रसारित हो चुके हैं। इस सीरियल में पवन को विलेन की भूमिका में दिखाया गया है जिसको दर्शकों ने खूब सराहा है। पवन को आमिर खान की दंगल फिल्म में भी एक छोटा सा रोल मिल चूका है। पवन कई कुश्तियां जीत चुके हैं और उनको कई ख़िताब भी मिल चुके हैं। वह महाराष्ट्र गुर्ज केसरी ,कर्नाटक केसरी का ख़िताब जीत चुके हैं। पवन इसके साथ ही पंजाब में  एक नं. की जोड़ी के मुकाबले में भी कुश्ती लड़ चुके हैं। पवन चांदी का गुर्ज प्राप्त ख्याति प्राप्त पहलवान हैं। वह कहते हैं कि हमारे गांव -देहात के आखाड़ों में आज भी वह सब सुविधाएँ उपलब्ध नहीं है जो एक अच्छे पहलवान को तैयार करने के लिए आवश्यक समझी जाती हैं अगर सही सुविधाएँ और सही मार्गदर्शन मिल जाये तो अच्छे स्तर के पहलवान वहां से निकल सकते हैं। पहलवान पवन यह भी कहते हैं कि भारत में आज भी मैट की बजाय मिट्टी को अधिक मान्यता दी जाती है। वो कहते हैं कि पहलवान को मिट्टी की मान्यता मिले तो उसको पहचान भी अच्छी मिलती है और देहात के दंगलों में शामिल होने से पैसा भी अच्छा मिल जाता है। वह बताते हैं कि सुशील और योगेश पहलवान ने हरियाणा को पूरी दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई है। 

वह कहते हैं कि बेशक सरकार अब पहले से ज्यादा भारतीय खेलों को प्रोत्साहन दे रही है मगर खिलाडियों विशेषकर पहलवानों को सरकारी नौकरियों में और अधिक शामिल किया जाना चाहिए इससे भारतीय कुश्ती विश्व में भारत को और भी ऊँचा गौरव दिलाने में सक्षम होगी। पवन अब तक सैंकड़ों कुश्ती लड़ चुके हैं जिनमें उनका मुकाबला विदेशी पहलवानों से भी हो चूका है मगर वो अपने साहस और ईच्छा -शक्ति के बल पर हमेशा विजयी रहे हैं।पवन से जब यह पूछा कि वह पहलवान नहीं होते तो क्या करते तो वह बोले क्या करता खेती ही करता और क्या करता ?

पवन कहते हैं कि उनको प्रात ; काल सुबह  जल्दी उठकर अखाड़े में नित अभ्यास करना होता है और कुश्ती के नए -नए दांव -पेच भी सीखना जरूरी होता है। किसी भी मुकाबले के लिए हमें शारीरिक रूप से तो तैयार रहना ही चाहिए साथ -साथ मानसिक रूप से भी तैयार होना जरूरी होता है। पवन की खुराक में दूध -घी ,फल ,और अंडे भी शामिल होते हैं। पहलवानी के लिए जहां निरंतर अभ्यास की  की जरूरत होती है वहीं पौष्टिक और संतुलित आहार भी बहुत जरूरी होता है ,यह पवन का कहना है। 

अंत में पवन दलाल कहते हैं कि सरकार हालाँकि खेलों को लेकर पहले से ज्यादा संजीदा हुई है लेकिन अभी गांव -देहात में अभी ओर अधिक खेल मैदान ,छोटे -छोटे स्टेडियम ,आधुनिक उपकरणों सहित आखाड़ों का निर्माण करके और अच्छे कोचों के दिशा निर्देश में ग्रामीण क्षेत्रों से खेल प्रतिभाओं को निखारने का मौका देने की बहुत आवश्यकता है। वह आज के युवा वर्ग से भी यही कहना  चाहते हैं कि उनको खेलों की और ज्यादा ध्यान देना चाहिए इससे जहां उनका शारीरिक विकास सही तरह से होता है वहीं हम नशों और दूसरे व्यसनों से भी बचे रहते हैं। [प्रस्तुति ;अश्विनी भाटिया ]


Saturday, 27 January 2018

गणतंत्र दिवस पर चौ. रामलाल भाटिया चैरिटेबल ट्रस्ट ने किया स्कूली बच्चों को गर्म जर्सियों का वितरण ।

                     अलवर (रमन भाटिया ) । यहां रामगढ तहसील के गांव गढ़ी स्थित राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विधालय में भारत के 69 वे गणतंत्र दिवस समारोह को बड़ी धूमधाम से मनाया गया। प्रधानाचार्य श्री कैलाश चंद मीणा ने तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शरुआत की। समारोह में मुख्य अथिति के रूप में चौ.रामलाल भाटिया चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन अधिवक्ता श्री अश्विनी भाटिया उपस्थित हुए। विशिष्ट अथिति के रूप में ट्रस्ट के महासचिव अधिवक्ता श्री प्रवीण चौधरी, कृषि अनुसंधान केंद्र नौगांव (अलवर ) में सहायक आचार्य डॉ रामकिशोर मीणा ,अधिवक्ता श्री तेजसिंह चौहान ,समाजसेवी बिजेंद्र गुप्ता सहित अधिवक्ता शैलेन रॉय के अलावा ट्रस्ट के गढ़ी गांव स्थित जनकल्याण केंद्र प्रमुख स्थानीय निवासी धर्मपाल भाटिया ,श्री राकेश भाटिया ,प्रेम भाटिया,और श्री रामकिशन खेड़ा (बहादर पुर ) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला -पुरुष समारोह में शामिल हुए। 

           समारोह में ट्रस्ट की ओर से ग्राम पंचायत गढ़ी /धनेटा में स्थित 7 सरकारी विधालयों और गांव नाखनौल के राजकीय माध्यमिक विधालय के लगभग 150 निर्धन छात्र -छात्राओं को गर्म जर्सियों का निशुल्क वितरण किया गया।समारोह में नाखनौल विधालय के मुख्य अध्यापक श्री रिछपाल सिंह को उनके स्कूल के 50 छात्र -छात्राओं के लिए गर्म जर्सियां ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सौंपी। इसके लिए रीछपाल सिंह ने ट्रस्ट का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि चौ. रामलाल चैरिटेबल ट्रस्ट ने पिछले वर्ष भी उनके विधालय के निर्धन छात्र -छात्राओं को निशुल्क गर्म जर्सियां देकर उपकृत किया था और ट्रस्ट के प्रयास से ही क्षेत्रीय विधायक श्री ज्ञान देव आहूजा ने स्कुल में 2 पक्के कमरों और प्रांगण के फर्श को पक्का बनवा दिया है जिसके लिए वह ट्रस्ट और विधायक महोदय का विशेषतौर से आभार व्यक्त करते हैं। 

    माता -पिता ,गुरुजनों , अपने गांव और देश का सम्मान हमेशा करना समारोह को सम्बोधित करते हुए श्री अश्विनी भाटिया ने कहा कि हम सब भारतीयों को अपने राष्ट्र ध्वज तिरंगे की आन -बान -शान के लिए हमेशा समर्पित रहना चाहिए और इसकी रक्षा के लिए जरूरत हो तो अपने प्राणों का बलिदान भी देने से पीछे नहीं हटना चाहिए।          उन्होंने कहा कि स्कुल राष्ट्र निर्माण का कार्य करते हैं। बच्चों को भी शिक्षित बनकर अपने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हमारा कर्तव्य है कि हम देश की आज़ादी के संघर्ष में कुर्बान हुए लाखों लोगों की कुर्बानी को हमेशा स्मरण और नमन करे। हमें राष्ट्रप्रेम की भावना की अलख को अपने ह्रदय में जीवन पर्यन्त जलाकर रखना चाहिए यही हमारी ओर से शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

 समारोह में स्कूली बच्चों ने  देश प्रेम से ओत -प्रोत कई गीत ,नृत्य ,लघु नाटिका और कविताओं की प्रस्तुति से सभी दर्शकों का मनमोह लिया। बच्चों की प्रस्तुति पर खुश होकर बहुत से उपस्थित लोगों ने उत्साह वर्धन हेतु बच्चों को नकद इनाम भी दिए। धर्मपाल भाटिया ने अपनी ओर से स्कुल स्टाफ को पेन और बच्चों को कापियां देकर पुरस्कृत किया।            

                                             श्री मीणा ने आये हुए सभी अतिथियों का धन्यवाद किया और कहा कि अश्विनी भाटिया और उनके साथी पिछले कई वर्षों से इस विसमारोह के अंत में प्रधानाचार्य धालय के लिए जो कार्य अपनी ट्रस्ट के माध्यम से कर रहे हैं वो सराहनीय है। उनकी भगवान से यही कामना है कि वह चौधरी रामलाल भाटिया ट्रस्ट को इतना सशक्त बनाये कि वह भविष्य में और भी अधिक क्षमता से ग्रामीण क्षेत्रों में जन - कल्याण के कार्यक्रम चला सके।श्री मीणा ने कहा कि उनके स्कुल ने जो भी विकास किया है उसमें उनके विधालय के  स्टाफ , क्षेत्रीय ग्रामीण और समाजिक संगठनों का विशेष योगदान है। अध्यापकों और छात्र -छात्राओं की कड़ी मेहनत के कारण ही उनके विधालय का नाम आज पुरे राजस्थान में सम्मान जनक स्थान प्राप्त कर पाया है। सामूहिक अथक प्रयासों और परिश्रम का ही परिणाम है कि उनके विधालय का वार्षिक परीक्षाफल पिछले कई वर्षों से शत -प्रतिशत आ रहा है और उनकी कामना है कि यह गति भविष्य में भी बनी रहेगी।अंत में बच्चों के लिए मिष्ठान प्रसाद की व्यवस्था धनेटा निवासी बिजेंद्र सपुत्र दर्शन लाल की ओर से की गयी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अध्यापक श्री ताराचंद ने किया।   



 


 




Saturday, 20 January 2018

स्वतन्त्रता संग्राम के महान नायक नेताजी आज भी लोगों के दिलों पर राज करते हैं।


भारत की आज़ादी के लिए लाखों असंख्य लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी जिसके परिणाम स्वरुप हमें 15  अगस्त, 1947  को विदेशी शासन से मुक्ति मिली। स्वाधीनता संग्राम में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस एक ऐसा महानायक है जिसने अंग्रेजी शासकों के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध किया और विश्व की उस समय के सबसे ताकतवर माने जानेवाले अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ों को हिला कर रख दिया। नेताजी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध लड़ रही  देशों की सेना के साथ अपनी आज़ाद हिन्द फ़ौज़ को भी युद्ध  के मैदान में उतार कर दुश्मनों के हौंसलें पस्त कर दिए। अफ़सोस जनक बात यह रही की देश की आज़ादी मिलते समय नेताजी न जाने कहाँ लोप हो गए।

   नेता जी का जन्म 23 जनवरी ,1897 को  उड़ीसा के कटक में एक बंगाली परिवार में हुआ। इनके पिता जानकीनाथ एक जाने -माने वकील थे और माता प्रभावती एक धर्मपरायण भारतीय संस्कारों से ओत -प्रोत महिला थी।नेताजी की शिक्षा -दीक्षा उच्च स्तर की हुयी और उन्होंने उच्च शिक्षा विदेश में हुयी। उन्होंने आई सी एस परीक्षा पास करके  अंग्रेजी शासन का प्रशासनिक अधिकारी का पद ठुकरा कर देश की आज़ादी की लड़ाई में कूदने का रास्ता चुना। वह कांग्रेस में शामिल हो गए ,लेकिन उनको अन्य कांग्रेसी नेतायों की गिड़गिड़ाने की नीति रास नहीं आई और उन्होंने शीघ्र ही अपना अलग रास्ता पकड़ा। 1938 में वह कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। 1939 में नेताजी महात्मा गांधी के विरोध के बावजूद कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत गए। अपने समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि  सीतारमैय्या की पराजय को महात्मा गांधी ने अपनी निजी हार माना। इसके बाद नेताजी ने कांग्रेस को त्याग कर अपनी अलग राह पकड़ ली। 

  नेताजी महात्मा गांधी की उदारवादी नीति से सहमत नहीं थे ,वह आज़ादी को ताकत के बल पर हासिल करना चाहते थे और इसके लिए आज़ाद हिन्द फ़ौज़ उनकी कमांड में अंग्रेजों के विरुद्ध पूरी ताकत से लड़ी।नेताजी [1933 -1936 ] यूरोप में रहे और यह दौर था हिटलर के नाजीवाद और मुसोलिनी के फासीवाद का। नाजीवाद और फासीवाद का निशाना इंग्लैंड था, जिसने पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी पर एकतरफा समझौते थोपे थे। वे उसका बदला इंग्लैंड से लेना चाहते थे। भारत पर भी अँग्रेज़ों का कब्जा था और इंग्लैंड के खिलाफ लड़ाई में नेताजी को हिटलर और मुसोलिनी में भविष्य का मित्र दिखाई पड़ रहा था। दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। उनका मानना था कि स्वतंत्रता हासिल करने के लिए राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक और सैन्य सहयोग की भी जरूरत पड़ती है।सुभाष चंद्र बोस ने 1937 में अपनी सेक्रेटरी और ऑस्ट्रियन युवती एमिली से शादी की। उन दोनों की एक अनीता नाम की एक बेटी भी हुई जो वर्तमान में जर्मनी में सपरिवार रहती हैं। नेताजी हिटलर से मिले। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत और देश की आजादी के लिए कई काम किए। उन्होंने 1943 में जर्मनी छोड़ दिया। वहां से वह जापान पहुंचे। जापान से वह सिंगापुर पहुंचे। जहां उन्होंने कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित आज़ाद हिंद फ़ौज की कमान अपने हाथों में ले ली। उस वक्त रास बिहारी बोस आज़ाद हिंद फ़ौज के नेता थे। उन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज का पुनर्गठन किया। महिलाओं के लिए रानी झांसी रेजिमेंट का भी गठन किया जिसकी लक्ष्मी सहगल कैप्टन बनी। 'नेताजी' के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चन्द्र ने सशक्त क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को 'आज़ाद हिन्द सरकार' की स्थापना की तथा 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' का गठन किया इस संगठन के प्रतीक चिह्न पर एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुँचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" दिया। 18 अगस्त 1945 को तोक्यो जाते समय ताइवान के पास नेताजी की मौत हवाई दुर्घटना में हो गई, लेकिन उनका शव नहीं मिल पाया। नेताजी की मौत के कारणों पर आज भी विवाद बना हुआ है।आज़ाद भारत कि सरकारों ने नेताजी के नाइंसाफी की है। उनके द्वारा भारत माँ की जो सेवा की गई है वह अतुलनीय है और उनकी आज़ादी की लड़ाई में योगदान को कांग्रेस ने जानबूझ कर वह महत्व नहीं दिया जिसके वो हक़दार है। अगर भारत को आज़ादी नेताजी के नेतृत्व में मिलती तो भारत आज दुनिया  के नक़्शे में दूसरी तस्वीर होती और दुनिया का नक्शा भी कुछ और ही होता।जो राष्ट्र अपने महानायकों को भूल जाता है न तो  दुनिया में उसको सम्मान मिलता है और न ही उसका अस्तित्व अधिक दिन तक बचा रह सकता है। हम आज अपने राष्ट्र के महानायक नेताजी की जयंती पर उनके चरणों में अपना शत -शत नमन करते और उनकी नीतियों पर चलकर अपने राष्ट्र की रक्षा और सेवा का संकल्प लेते हैं।- जय हिन्द। [अश्विनी भाटिया ]  

  

          



Friday, 22 December 2017

तपस्वी जीवन जीनेवाले चौ. शिवराजसिंह जी की पुण्यतिथि पर हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि

तपस्वी जीवन जीनेवाले चौ. शिवराजसिंह जी की 13 वीं पुण्यतिथि पर हमारी ओर से उनके चरणों में भावभीनी श्रद्धांजलि। सादगी ,गंभीरता और समाज के हित में सोच की प्रवृति से ओत -प्रोत मानवीय मूल्यों के लिए किसी से भी समझौता न करनेवाले तपस्वी स्वर्गीय चौधरी शिवराज सिंह [एडवोकेट ] जी, आज के दिन 23 दिसम्बर ,2005 को इस लोक से अपनी जीवनयात्रा को पूर्ण करके परलोक धाम को चले गए। मेरे पिता तुल्य पूजनीय चौ. साहब के सानिध्य में मुझे कई वर्षों तक रहने और इस दुनिया को समझने ,जीने का अवसर मिला है।


वो आज बेशक भौतिक रूप से हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन अदृश्य रूप से अपनी मधुर स्मृतियों के साथ  हमारे मन -मष्तिक में हमेशा बने रहेंगे। आज भी जीवन की राह में आनेवाली कठिन परिस्थितिओं की  तपिश में उनका आशीर्वाद मुझे हवा के शीतल झोंके का अहसास करवाता रहता है ,जो मेरे को हर विकट और प्रतिकूल  परिस्थिति का और भी अधिक हौंसले के साथ सामना करने का साहस प्रदान करता है। मैं  आज उनकी 13 वीं पुण्यतिथि पर उनको अपना शत -२ नमन करता हूँ।मैं  ईश्वर से और दिवंगत आत्मा से भी यह प्रार्थना करता हूँ कि वह अपना स्नेह और आशीर्वाद हम पर हमेशा बनाये रहे चौ. साहब नाम से पहचाने जानेवाले शिवराज जी ने हमेशा समाज कल्याण की सोच और मानवीय दृष्टिकोण को अपने से अलग नहीं होने दिया।  चौ. साहब लम्बे समय तक किसान नेता चौधरी चरण सिंह के निकट सहयोगी रहे और आपात्तकाल [ 1975 -1977 ] के दौरान  कारागार में भी रहे,लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया।  उन्होंने आपात्तकाल के बाद 1977 के आम चुनाव में  जनता पार्टी के टिकट पर  लोकसभा सीट पर लड़ने के चौधरी चरणसिंह के  प्रस्ताव को स्वीकार न करके अपने निस्वार्थ सेवा भाव का जो अनूठा उदाहरण समाज के सामने रखा वह अतुलनीय है। उनके व्यक्तित्व का यह पक्ष  उनके अंतरमन में आसीन एक ऐसे तपस्वी का दर्शन समाज को करवाता है जो सिर्फ इस जीवन में त्याग की भावना को लेकर अपने कर्म मार्ग पर चलने में विश्वास रखता है।उनके सानिध्य में रहकर उन्होंने असंख्य अधिवक्ताओं को  क़ानूनी दांवपेंच बेशक सिखाये हों, परन्तु इसके साथ -२ उन्होंने समाज के  कमजोर और असहाय लोगों की सहायता करने की सीख भी दी। उनके पुत्र प्रवीण चौधरी वर्तमान में एक सफल अधिवक्ता हैं और शाहदरा बार एसोसिएशन के सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। [अश्विनी भाटिया ] 

Sunday, 17 December 2017

विलम्ब से मिला न्याय भी अन्याय। जनता को उसकी भाषा में मिले न्याय -रामनाथ कोविंद

इलाहबाद। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा है कि देश की जनता को न्याय उसी की भाषा में मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायालयों को यह व्यवस्था करनी चाहिए कि कोर्ट में बहस और फैंसला स्थानीय भाषा में होना चाहिए और हिन्दी कोर्ट निर्णयों का अनुवाद होना चाहिए ताकि आम आदमी इनको सही तरह से समझ सके। अब देखना यह है कि अंग्रेजियत में रंगी भारत की अदालतें महामहिम के इस सुझाव का कितना सम्मान रखती हैं।वैसे देश के कुछ राज्यों की अदालतें इस दिशा में काम करना प्रारम्भ कर चुकी हैं। छतीसगढ़ उच्च न्यायालय में इस और अपने कदम बढ़ा भी दिए हैं और बाकी अन्य अदालतों को इस ओर काम करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि ऐसा करने से जहां जनता को अदालती फैंसलों को समझने में आसानी होगी वहीं न्यायालयों का सम्मान भी और अधिक बढ़ जायेगा। 

   राष्ट्रपति महोदय ने कल शनिवार को इलाहबाद के झलवा में प्रस्तावित न्याय ग्राम टाउनशिप की आधारशिला रखने के बाद इलाहबाद उच्च न्यायालय में आयोजित समारोह में अपने सम्बोधन के दौरान यह बात रखी।उन्होंने कहा कि वादकारियों को सस्ता ,सरल और सुलभ न्याय मिलना बहुत आवश्यक है। इससे जनता की नजरों में न्यायालयों का कद और भी अधिक बढ़ जायेगा। महामहिम ने कहा कि न्याय व्यवस्था से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने बहुत ही निकट से यह देखा है कि गरीब को न्याय कैसे मिलता है। आज हालात यह हैं कि देश का सामान्य जनमानस न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने से बचता है। वर्तमान व्यवस्था को बदलने का समय आ चुका है। देश में करोड़ों की संख्या में केस विभिन्न न्यायालयों में लंबित पड़े हैं। करीब 40 लाख मामले अटके पड़े हैं और करीब 10 लाख मामले 10 वर्षों से भी अधिक समय से चल रहे हैं। देर से मिला न्याय भी अन्याय की श्रेणी में ही आता है। उन्होंने कहा अब वैकल्पिक न्याय प्रणाली को अस्तित्व में लाने की आवश्यकता है। 

  इस समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक भूषण ,न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल ने महामहिम के सम्बोधन से पहले अपना वक्तव्य रखते हुए कहा कि न्याय प्रणाली को अक्षुण्ण रखना बहुत ही आवश्यक है। राज्यपाल राम नाइक ने भी सरल और सुलभ न्यायतंत्र विकसित करने पर जोर दिया और कहा कि न्याय ग्राम टाउनशिप के निर्माण की समीक्षा हर माह करने के लिए एक कमेटी का होना भी जरूरी है।मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने भी अपने सम्बोधन में कहा कि उनकी सरकार न्याय प्रणाली को सुद्ढ़ बनाये रखने का और अपने संवैधानिक जिम्मेदारी को भी हर सम्भव निभाने का प्रयास करेगी। 

कोर्ट ने पत्रकार सुहैब इलियासी को माना पत्नी अंजू की हत्या का दोषी। सज़ा का फैंसला 20 को।

शाहदरा /दिल्ली। [रमन भाटिया ] एक समय टीवी चैनल पर अपराधों पर एपिसोड इंडिया मोस्ट वांटेड शो बनाकर मशहूर हुए पत्रकार सुहैब इलियासी अपनी पत्नी की हत्या के दोषी पाए गए हैं। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायधीश श्री एस के मल्होत्रा  ने गत शनिवार को अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की बहस और दलीलों को सुनने के बाद आरोपी इलियासी को अपनी पत्नी  की हत्या का दोषी करार दिया कोर्ट द्वारा इस मामले में आगामी 20 दिसंबर को सज़ा पर बहस होने के बाद सजा सुनाई जायेगी। क़ानूनी जानकारों के अनुसार जिन आरोपों में आरोपी दोषी पाया गया है उसमे उसको उम्र कैद तक की सज़ा हो सकती है।सुहैब ने 90 के दशक में भारत में टेलीविजन पर अपराधों पर आधारित सीरियल की शुरुआत की थी और उसको इस शो से काफी प्रसिद्धि भी मिली थी। 

          ज्ञात हो कि गत 11 जनवरी , 2000 को मयूर विहार फेस -1स्थित में सुहैब इलियासी की पत्नि अंजू  अपने घर में चाकू लगने से संदिग्ध हालत में मृत पायी गयी थी पुलिस ने केस की जाँच के बाद 28 मार्च , 2000 को शोएब इलियासी को पत्नि अंजू की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था और बाद में उसको निचली अदालत से जमानत भी मिल गयी थी। 29 मार्च ,2011 को निचली अदालत में इलियासी के विरुद्ध दहेज प्रताड़ना और दहेज के लिए हत्या के आरोप तय कर दिए गए।भारतीय दंड विधान की जिन धाराओं में इलियासी के विरुद्ध आरोप तय किये गए थे , उनको मृतिका अंजू की माँ रुक्मा सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायलय में चुनौति देते हए न्यायालय से हत्या ,सबूत मिटाने सहित अन्य विभिन्न धाराओं के अंतर्गत आरोप तय करने की मांग की। इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने 12 अगस्त ,2014 को इलियासी के विरुद्ध हत्या का केस चलाने का निर्देश जारी किया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह कहा अंजू की बहनों के बयानों के बाद प्रथम दृष्टया इलियासी के विरुद्ध हत्या के अपराध का मामला बनता है।अतः आरोपी के विरुद्ध हत्या के आरोप में केस की सुनवाई की जाये।

Friday, 15 December 2017

कड़ी मेहनत- सच्ची लगन और मानसिक तैयारी से ही हम अपने लक्ष्य को भेद सकते हैं -गौरव वासुदेव

              मुंबई माया नगरी शुरू से ही देश के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। इस नगरी में पुरे देश से नौजवान फ़िल्मी पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का सपना लेकर जाते हैं। इनकी तादाद हजारों नहीं लाखों में भी हो सकती हैं लेकिन इस भीड़ में से कुछ गिनती के लोग ही अपना सपना साकार कर पाते हैं। इन सौभाग्यशाली युवाओं में से एक नाम हम  गौरव वासुदेव का भी ले सकते हैं जिन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की है और अपनी अभिनय कला को निखारने के लिए घोर तप भी किया। बेशक वह छोटे पर्दे पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो चुके हैं  मगर वो कहते हैं कि उनकी मंजिल अभी दूर है और उसको पाने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।गत  दिनों गौरव वासुदेव के साथ सजग वार्ता डॉट कॉम की ओर से अश्विनी भाटिया की हुयी एक मुलाकत में उनके जीवन से जुडी कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। यहां उसी बातचीत के आधार पर लिखित यह रिपोर्ट प्रस्तुत है ;

                  पंजाब की सांस्कृतिक राजधानी माने जानेवाले जालंधर में सन 1987 को एक साधारण परिवार में जन्में गौरव वासुदेव कहते हैं कि जब वह दसवीं कक्षा में पढ़ते थे तो उन्होंने तभी से ही अभिनय के क्षेत्र में काम करने की इच्छा मन में पाल ली थी जो वक्त के साथ -साथ और प्रबल होती चली गयी। वह कहते हैं कि उनके परिवार से कोई भी सदस्य पहले इस क्षेत्र में नहीं रहा।2008 में कॉलेज में पढ़ते हुए वह थियेटर से जुड़ गए और यह जुड़ाव ही उनकी अभिनय की दुनिया में आने का प्रवेश द्धार बना।

                     
              स्टार न्यूज में भी कुछ दिन काम करने के बाद उन्होंने कई टेली फिल्मों और विज्ञापन फिल्मों में काम किया। कुछ नाट्य रूपांतरों में भी काम कर चुके गौरव कहते हैं कि मैं अभिनय की दुनिया में अलग -अलग तरह की भूमिकाओं में खुद को जीते हुए देखना पसंद करूंगा। गौरव क्लर  टी वी चैनल पर प्रसारित हुए धारावाहिक उतरन जैसे प्रसिद्ध टी वी  सीरियल में भूमिका निभा चुके हैं। अभी हाल में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बने सीरियल पौरस में गौरव को काम करने का मौका मिला है। इसकी शुरआत में ही गौरव को एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली जिसको उन्होंने बड़ी खूबसूरती से अदा किया है। जी टी वी पर प्रसारित
 महाराजा रणजीत सिंह धारावाहिक में एक ब्रिटिश की भूमिका निभानेवाले वासुदेव ने इश्कबाज़ सीरियल में एक सिख युवक की भूमिका को बड़े सुंदर तरीके से निभाकर दर्शकों में अपनी खास पहचान बना ली है।ज़ी -टीवी चैनल पर सिन्दबाज़ जिन्दाबाज़  में भी गौरव वासुदेव महत्वपूर्ण किरदार का रोल निभा चुके हैं। इसी तरह से बाल -कृष्ण में भी गौरव को दर्शक एक महत्वपूर्ण भूमिका में देखेंगे। अगले महीने यानि जनवरी 2018 लाँच होनेवाले नये टीवी चैनल डिस्कवरी जीत पर एक धारावाहिक बैटल ऑफ़ सारागढ़ी में भी गौरव वासुदेव को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते देखा जायेगा। 

         
गौरव ने बताया कि केंद्र सरकार ने जब एक हज़ार और पांच सौ के पुराने नोटों के चलन पर रोक लगा दी तो एक टी वी विज्ञापन में उनको कश्मीरी युवक के रूप में प्रस्तुत किया गया था।इस विज्ञापन में निभाई गई मेरी भूमिका इतनी सशक्त थी कि उसके प्रसारित होने पर मुझे देश के कई अलग -अलग कोणों से दर्शकों की गलियां भी सुनने को मिली। दर्शकों की ओर से मिली इन गलियों से मैंने यह समझ लिया कि मेरे अभिनय को लोगों ने गंभीरता से लिया है जो किसी भी कलाकार के लिए पारितोष से कम नहीं समान समझा जाना चाहिए।
छोटे पर्दे से दर्शकों के बीच अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का लोहा मनवा चुके गौरव यह भी कहते हैं कि उनको अभी और कड़ी मेहनत करनी है क्योंकि कड़ी मेहनत ही हमको अपना लक्ष्य पाने के नजदीक ले जाती है। गौरव कहते हैं वह अभिनय के क्षेत्र में अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज़ करवाना चाहते हैं कि जिससे मेरे

 दर्शक मुझसे अगाध प्रेम करने लगे और मेरे पर अपना आशीर्वाद हमेशा बनाये रखें। वह कहते हैं कि वैसे तो उन्हें हर तरह की भूमिकाएं निभाने में आनंद आता है लेकिन फिर भी मैं आक्रामक भूमिकाओं को निभाने में खुद को निभाए जानेवाले पात्र [किरदार ]के ज्यादा समीप और अनुकूल पाता हूँ।  

गौरव भी बड़े पर्दे पर अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करने को बेताब हैं और उनको कई प्रस्ताव भी मिल रहे हैं परन्तु एक कम्पनी के साथ किये गए अनुबंध के कारण अभी वह अपनी स्वेच्छा से कहीं भी अभिनय करने को स्वतंत्र नहीं हैं। वह युवाओं को संदेश देते हैं कि कड़ी मेहनत और सच्ची लग्न के साथ मानसिक तैयारी करके ही अपने द्वारा निर्धारित लक्ष को पाया जा सकता है आधी -अधूरी मेहनत और तैयारी के साथ हमें कुछ भी प्राप्त होनेवाला नहीं है। गौरव का कहना यह भी है कि किसी भी काम में सफलता पाने के लिए व्यक्ति को कभी भी उतावला नहीं  होना चाहिए इससे मानसिक कुंठा भी पैदा हो सकती है जो असफल होने पर हमें अपने मार्ग से विचलित क्र सकती है। हम अपने मार्ग से भटक न सकें तो इसलिए हमें किसी काम  सफलता तक पहुंचने के लिए संयम बरतना चाहिए। संयम से हम अपने लक्ष्य को पाने में  हमें एक अलग प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है जो हमें अपने नए मुकाम पर ले जाने को प्रेरित भी करती है। 

 


Tuesday, 28 November 2017

कांग्रेस का पटेलों को आरक्षण देने का क्या फार्मूला है स्पष्ट क्यों नहीं करती ?

गुजरात में विधानसभा का चुनावी घमासान धीरे -धीरे बढ़ता जा रहा है।कांग्रेस यहां जातिवादी जहर फैलाकर चुनावी लाभ उठाना चाहती है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य होने के कारण लगता नहीं की वो अपने मंसूबे में कामयाब हो पाएगी। इस चुनाव में भाजपा पुरे लाव -लश्कर के साथ उतर चुकी है और किसी भी तरह की कमी वो नहीं छोड़ना चाहती है। पटेल समुदाय को आरक्षण दिलाने के नाम पर हार्दिक पटेल कांग्रेस की नाव में सवार हो चुके हैं और इस बात का दावा करते घूम रहे हैं की इस बार गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनेगी और पटेल समुदाय को आरक्षण देगी। अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस कैसे पटेल समुदाय को आरक्षण देगी क्योंकि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है ? कांग्रेस को और विशेष रूप से इसके युवराज राहुल गाँधी को इस बात का जवाब देना ही चाहिए कि आरक्षण देने का उनका फार्मूला क्या है ?                      कांग्रेस के नेताओं को शायद यह मति भ्रम हो गया है कि गुजरात की जनता उनके जातिवादी कार्ड में आकर उनकी चुनावी नैया पर लगा देगी। प्रधानमंत्री मोदी भी चुनावी दंगल में कूद चुके हैं और उन्होंने इस चुनाव को गुजरात से बाहर निकाल कर भाजपा को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लड़ने का फार्मूला थमा दिया है। मोदी के आगे राहुल और उनके नए खेवनहार बने हार्दिक पटेल बहुत ही बौने साबित हो रहे हैं।मजेदार बात  तो यह है कि चुनावी रणनीति में माहिर मोदी और अमित शाह कांग्रेस को घेरकर अपने हिसाब से चुनावी दंगल खेलना चाहते हैं और कांग्रेस न चाहते हुए भी इस घेराबंदी में आ चुकी है। कांग्रेस के पास न तो कोई ऐसे नेता हैं जो भाजपा के नेताओं की फ़ौज के आगे टिक सकें और न ही कोई स्पष्ट रणनीति उनके पास दिखाई दे रही है।राजनितिक रूप से अपरिपक्व और  अपनी बेवकूफी भरे बयान देने में माहिर राहुल गाँधी को भी अब खुद को हिन्दू हितैषी दिखाने को मोदी मजबूर कर  चुके हैं।

                गुजरात के चुनाव इस बार भी मोदी के इर्द -गिर्द ही रहनेवाले हैं। पाकिस्तानी आतंकवादी हाफिज सईद की रिहाई पर राहुल गाँधी का पी एम मोदी पर किया गया व्यंग अब कांग्रेस की गले की फ़ांस बनता जा रहा है। हमेशा मुस्लिम तुष्टिकरण की निति को अपनाये रखनेवाली कांग्रेस हिन्दुओं वोटों को हथियाने के लिए जातिवादी विष घोलकर अपना उल्लू सीधा करने के षड्यंत्र में लगी हुयी है। पटेल आंदोलन के समय हार्दिक पटेल के साथ रहनेवाले कई युवा उससे अलग हो चुके हैं। पट्टीदारों और दलितों को अपनी ओर खींचने की फ़िराक में लगी कांग्रेस यह भूल रही है कि अब हिन्दू समुदाय उसको अच्छी तरह से पहचान चुका और वः उसकी तोड़फोड़ की बातों में फँसनेवाला नहीं है। कांग्रेस के  किसी भी षड्यंत्र को गुजरात की जनताइस बार भी कामयाब नहीं होने देगी क्योंकि उसकी असली फितरत को अब वो भली -भांति जान चुकी है। देश और समाज को तोड़कर अपना राजनैतिक उल्लू को सीधा करने की कांग्रेसी की निति अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। 

गुजरात की जनता को इस बात का गर्व है कि उनके राज्य का नेता देश का प्रधानमंत्री हैं और वह कभी भी ऐसा काम नहीं करेगी कि उनकी वजह से उनके प्रधानमंत्री को नीचा देखना पड़े। राजनीती के माहिर खिलाडी मोदी भी इस बात को भली -भांति समझते हैं।कांग्रेस का अपरिपक्व नेतृत्व किसी भी तरह से इस चुनावी समर को जीतने में कामयाब नहीं हो सकता क्योंकि जनता मोदी के अब तक के कार्यों से संतुष्ट दिखाई देती है। मोदी सरकार के लगभग साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में किसी तरह का कोई भ्रष्टाचार का कोई मामला अभी तक सामने न आना भी मोदी के दामन को पाक - साफ साबित करता है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के दामन पर भ्रष्टाचार और घोटालों के असंख्य दाग हैं जो किसी भी तरह से न तो धुल पाए हैं और न ही जनता उनको भूल पायी है। [अश्विनी भाटिया ] 

बॉडी बिल्डिंग में मिस्टर वर्ल्ड -2018 का ख़िताब पाना ही मेरा सपना -राजीव खन्ना

आजकल युवावर्ग में जिम जाकर बॉडी बनाने का जनून काफी बढ़ता जा रहा है।कई तो  घंटों पसीना बहाकर अपनी बॉडी को आकर्षक आकार  देकर मॉडलिंग की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। बहुत से युवा अपनी दमदार और आकर्षक बॉडी के दम पर ही कई बड़ी कंपनियों के ब्रांड अम्बेस्डर बन चुके हैं। बॉडी बिल्डिंग के शो भी कहीं न कहीं आयोजित होते हैं जिसमें शरीर सौष्ठव  प्रतियोगिता में भी वह अपने शरीर का प्रदर्शन करके सम्मान प्राप्त करते हैं। बॉडी बिल्डर,न्यूट्रिशन , जिम ट्रेनर और इंटरनेशनल फिटनेस मॉडल राजीव खन्ना का नाम मॉडलिंग की दुनिया में काफी लोकप्रिय हो चुका है। श्री राजीव खन्ना ओमटेक्स स्पोर्ट्स में ब्रांड अम्बेस्डर हैं और आर के एस्थेटिक्स एंड मसल्स टाउन -दी जिम के स्वामी ,फिटनेस, न्यूट्रिशन एक्सपर्ट और ट्रेनर भी हैं। इस फिल्ड में काम कर रहे   बहुत से युवा राजीव को अपना आदर्श मानते हैं और उनसे प्रेरणा भी लेते हैं।इन्होने ISSA [इंटरनेशनल स्पोर्ट्स साइंसस एसोसिएशन]में भी स्टडी की है। इंडिया बॉडी बिल्डिंग एंड फिटनेस फैडरेशन [ IBFF ] नार्थ इंडिया के महासचिव [ पूर्व अध्यक्ष उत्तरप्रदेश स्टेट ] श्री खन्ना  यू पी स्टेट से इकलौते बॉडी बिल्डर हैं जो इंटरनेशनल फिटनेस मॉडल भी हैं और कई देशों में होनेवाले शो में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।  गत दिनों सजगवार्ता डॉट कॉम की ओर से अश्विनी भाटीया की  इस इंटरनेशन फिटनेस मॉडल श्री राजीव खन्ना से उनके जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर विस्तृत बातचीत हुई और उनके बारे में बहुत सी जानकारियां भी मिली । यहां उसी बातचीत के कुछ अंश प्रस्तुत हैं ; 

श्री राजीव खन्ना उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में जन्में और पले -बढ़े  हैं। उनके मार्गदर्शन में बहुत युवा अपने शोंक को पूरा करके खुद को मॉडलिंग के लिए तैयार कर रहे हैं।राजीव ने बताया कि पिछले 7 वर्षों से वह अपना पसीना जिम में बहाकर ही आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। राजीव कहते हैं कि बॉडी बनाने के शौकीन युवाओं के लिए जिम में कुशल ट्रेनर की उपस्थिति भी जरूरी है जिसके निर्देशन में वो बॉडी बनाने का अभ्यास सही तरह से कर सकें। यह ट्रेनर ही उनको सही मार्गदर्शन देकर उनके सपने  को साकार करवाते हैं और उनको फैशन शो और रैंप पर प्रदर्शन दिखने के लिए तैयार भी करते हैं। वो कहते हैं कि उचित मार्गदर्शन के अभाव में जिम में मशीनों पर की गई मेहनत और उसके अनुसार डाइट न लेकर कई बार इसके दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ सकते है। इसलिए किसी अनुभवी और कुशल जिम ट्रेनर के मार्गदर्शन में ही बॉडी बनाने की एक्सरसाइज  और न्यूट्रिशन से डाइट चार्ट के अनुसार खुराक व सप्लीमेंट्स लेने चाहियें। राजीव का कहना है कि बिना गाइडेंस के बॉडी बनाने के चककर में फ़ूड सप्लीमेंट्स खाना खतरनाक साबित हो सकता है।                  

अपनी मेहनत और लग्न के दम पर राजीव खन्ना एक आकर्षक और मजबूत बॉडी के स्वामी हैं और वह बहुत सी बॉडी बिल्डर्स व् मॉडलिंग प्रतियोगिताओं में शामिल होकर अपनी दमदार बॉडी का प्रदर्शन करके कई अवार्ड भी जीत चुके हैं।अभी 4 नवंबर को ही राजीव खन्ना को इंडिया बॉडी बिल्डिंग एंड फिटनेस फैडरेशन की ओर से आई बी एफ एफ अवार्ड  से सम्मानित किया गया है और उनको फैडरेशन का नार्थ इंडिया का महासचिव पद का कार्यभार भी सौंपा गया है। मॉडल राजीव कहते हैं कि उनका अगला लक्ष्य निकट भविष्य में होनेवाली मि.वर्ल्ड प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर [ अपनी शारीरिक  कैटागिरी के अनुसार ]मिस्टर वर्ल्ड का ताज जीतने का है जिसके लिए वो दिन -रात जी -तोड़ मेहनत करने में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि मुझे पूरा विश्वास है कि बॉडी बिल्डिंग  कम्पटीशन में मैं मिस्टर वर्ल्ड -2018 का ताज अवश्य पहनूँगा।  राजीव कहते हैं कोई भी व्यक्ति बिना आत्मविश्वास के किसी भी लक्ष्य को नहीं भेद सकता है। अपने सपने को साकार करने के लिए हमें कड़ी मेहनत,आत्मसंयम ,पूरी लग्न और निष्ठा से काम करना चाहिए इनके बिना कोई भी व्यक्ति या ऐथलीट किसी भी प्रतियोगिता में जीतना तो दूर ज्यादा देर टिक भी नहीं सकता है।  इंटरनेशनल फिटनेस मॉडल राजीव खन्ना ने कहा कि मौका मिला तो अभिनय के क्षेत्र में भी वो कदम अवश्य रखेंगे।                    


 


       

Saturday, 25 November 2017

मॉडलिंग से शरुवात करके बॉलीवुड में अहम उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं राहुल चौधरी।

        आज कैरियर को बनाने और रोजी -रोटी कमाने की अंधी होड़ ने बहुत सारी प्रतिभाओं को समाप्त कर दिया है। बहुत से लोग अपने अंदर मौजूद विलक्षण प्रतिभा का गला घोंटकर अनिच्छा से जीवन जीने को मजबूर हैं। 

आपको आज बहुत कम ऐसे युवा मिलेंगे जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी न तो अपने अंदर के कलाकार को मरने दिया और न ही अपनी दिली इच्छा को दबने दिया। अपने मन में खुद को लेकर बचपन से ही देखे हसीन सपने को साकार करने का जोखिमपूर्ण कदम उठाने वाले बहुत कम लोग ही हैं।ऐसे  ही लोगों में से एक नाम राहुल चौधरी का भी है जिन्होंने अपने बचपन में खुद को अभिनेता बनाने के सपने को साकार करने हेतु सरकारी सेवा को भी तिलांजलि दे डाली।

                    मुंबई महानगरी की फ़िल्मी चकाचौंध ने शुरू से ही युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया है।यहां प्रतिदिन हज़ारों लोग अपनी आँखों में पर्दे पर दिखने का एक ही सपना लेकर आते हैं। यह युवा इस माया नगरी में अपनी उपस्थिति एक ऐसे लोकप्रिय अभिनेता के रूप में दर्ज करवाना चाहते हैं जिसके लाखों चाहने वाले हों।यह सपना देखनेवाली भीड़ में से सिर्फ एक -दो लोग ही अपना सपना साकार कर पाते हैं बाकि कुछ वर्षों तक धक्के खाकर निराश होकर वापिस लौट जाते हैं।                                                      त्तरप्रदेश के गाजियाबाद जिले के महरौली गांव के जाट परिवार में 19 नवंबर ,1986 को जन्मे राहुल चौधरी उन विरले युवाओं में से एक सौभाग्यशाली व्यक्ति हैं जो मायानगरी में अपनी अभिनय प्रतिभा और आकर्षक व्यक्तित्व के दम पर उपस्थिति दर्ज़ करवाने में सफल  हुए हैं। गत दिनों  सजग वार्ता डॉट काम के प्रतिनिधि अश्विनी भाटिया की राहुल चौधरी से हुई मुलाकात में विस्तृत बातचीत हुई। इस बातचीत में उनके जीवन से जुड़े कई अनछुये पहलुओं से लेकर अब तक के फ़िल्मी सफर के बारे में रोचक जानकारी भी मिली। मधुर और सौम्य वाणी के धनी राहुल से की गई बातचीत के आधार पर यहां यह परिचर्चा प्रस्तुत  है ;   

                 राहुल के फ़िल्मी सफर की शुरूवात भी मॉडलिंग से ही हुई है। उन्होंने बहुत सी लघु -फिल्मों के अलावा कई एंटरनटमेन्ट चैनलों पर प्रसारित लोकप्रिय धारावाहिकों में भी विभिन्न सकारात्मक और नकारात्मक पत्रों की भूमिका बड़ी खूबसूरती से निभाई है। जिनमें  स्टार प्लस ,लाइफ ओ के और सोनी चैनल प्रमुख हैं। इन धारावाहिकों में सोनी चैनल पर भारत का वीर सपूत -महाराणा प्रताप ,लाइफ ओ के पर प्रदर्शित नागार्जुन -एक  योद्धा, और कलर चैनल पर प्रदर्शित चक्रवर्ती अशोका सम्राट  में काम करके राहुल दर्शकों में काफी लोकप्रिय हो चुके हैं।

            मेरठ स्थित चौधरी      चरणसिंह विश्वविधालय से कैमस्ट्री ऑनर्स से स्नातक की डिग्री लेने के उपरांत राहुल भारतीय सेना में शामिल हो गए। राहुल जुडो -कराटे भी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। राहुल ने बताया कि परिवार वालों की ईच्छा को मानते हुए उन्होंने यह सरकारी नौकरी प्राप्त तो कर ली लेकिन उनके मन का पंछी तो अभिनय के आकाश में ऊँची उड़ान भरने को फड़फड़ा रहा था। साढ़े चार वर्ष तक अनमने मन से सेना में गुजारने के बाद आखिर राहुल ने इस सरकारी सेवा को वर्ष 2009 में हमेशा के लिए त्याग दिया और घर वापिस लौट आये। एक साल तक घर में रहने के बाद आखिरकार  उन्होंने दृढ़ निश्चय कर लिया कि चाहे उनको कुछ भी करना पड़े वो अपने अंदर छुपे कलाकार को उसके असली मुकाम पर ले जाकर ही दम लेंगे। 

                  राहुल ने दिल्ली स्थित  इलाईट मॉडलिंग मैनेजमेंट स्कुल से मॉडलिंग कोर्स करने के बाद कई प्रसिद्ध फैशन डिजाईनरों  -आसिफ मर्चेंट ,असलम खान ,अनिल होसानी और कोरियोग्राफर लेवल प्रभु के लिए मॉडलिंग का काम किया। इसके अलावा राहुल को लेकर कई प्रसिद्ध ब्रांड्स के लिए प्रिंट फोटो शूट भी किये गए हैं। इसके बाद वह थिऐटर से जुड़ गए। थियेटर में मुजीब खान के साथ 2 साल  तक कड़ी मेहनत की और इस दौरान उनको अपने अंदर छुपे अभिनेता ने खुद को तराशकर  नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया। राहुल ने दिल्ली स्थित  आईडियल  ड्रामा एन्ड एंटरटेन्मेंट अकादमी [आई डी एम् ए ] से मॉडलिंग का कोर्स किया और नए आत्मविश्वास और जोश के साथ अपना असल सपना साकार करने बॉलीवुड की दुनिया मुम्बई पहुँच गए।

           यहां  राहुल ने मंचीय अभिनय [फिजिकल थियेटर ]की बारीकियों    को गंभीरता से समझा और सीखा। मैं अपने सपने को मूर्त रूप देने के लिए खुद को हर तरह से सक्षम बनाकर ही फ़िल्मी पर्दे की नई पारी खेलना चाहता था और इसीलिए मैंने कड़ी मेहनत के साथ अभिनय कला को सीखने में कोई गुरेज नहीं किया। वह  कहते हैं कि मुजीब खान के साथ काम करके उन्हें अभिनय के कई गुर सीखने का मौका मिला।इसी दौरान उन्होंने कई वर्कशॉप भी अटेंड की। 

                 कई बड़ी और नामी कंपनियों ने राहुल को अपने विज्ञापनों में अपना ब्रांड अम्बेस्डर बना लिया। जिन कंपनियों ने राहुल को लेकर प्रिंट शूट किये उनमें -रेमन्ड ,पोलो मिंट टी वी सी ,एल आई सी ऑफ़ इण्डिया के जीवन लाभ,लूप मोबाईल इण्डिया ,टी क्यू एस गारमेंट्स में इमरान हाश्मी के साथ ,पी एन राव गारमेंट्स [ बैंगलोर] , ईस्ट पॉइंट डेवेलपर्स [बैंगलोर ],सन फार्मेसी [रिटेंस ]और एल एस डी गारमेंट्स प्रमुख हैं। 

       राहुल कई फैशन शो में रैम्प पर उतरकर शो का  मुख्य आकर्षण भी बने हैं। इनमें रायपुर फैशन शो ,भोपाल फैशन शो ,एकुवा फैशन टूर ,ऍफ़ टी वी शो  [पंजाब ],स्टार नाईट फैशन शो ,वी आई पी लगेज शो मुंबई और डी सी सिग्नेचर इंडिया -2016 प्रमुख फैशन शो हैं जिनमें दर्शकों ने राहुल को बहुत पसंद किया। राहुल ने कई लघु फिल्मों में भी कार्य किया है जिनमें -ए मेट्रो जरनी ,सोच -  ,वक्त -एक अहसास और दूर प्रमुख लघु फ़िल्में हैं।इसके अलावा राहुल सावधान इण्डिया ,कोड रेड ,सी आई दी ,एजेंट राघव -क्राइम ब्रांच ,क्राईम पैट्रोल और मर्यादा ;लेकिन कब तक सीरियल में भी अहम भूमिका अदा करके दर्शकों में अपनी पहचान एक अभिनेता के रूप में बना चुके हैं।  

राहुल को श्रेया सिने विजन की दोस्ती जिंदाबाद  फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने का जो अवसर मिला यह उनके फ़िल्मी सफर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस फिल्म में शक्ति कपूर ,अयूब खान और मोहन जोशी जैसे बड़े कलाकारों ने भी अभिनय किया था। प्रसिद्ध निर्देशक पार्थो घोष द्वारा निर्देशित अग्नि साक्षी फिल्म में जरीना वहाब और जीनत अमान जैसे स्थापित फिल्म अभिनेत्रियों के साथ राहुल को लिया गया।  फिल्म -मैं खुदी राम बोस में भी राहुल को अहम रोल मिला था जिसको उन्होंने बखूबी निभाया है। इसके अलावा राहुल ने वेब सीरीज की बहुत सी फिल्मों में अहम भूमिका निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवा दिया है।   

                          राहुल  ने बातचीत के अंतिम पड़ाव में बताया कि उनकी यह हार्दिक इच्छा है  कि वह अक्षय कुमार और शाहरुफ खान के साथ किसी फिल्म में काम करें।राहुल कहते हैं कि आज के दौर की फ़िल्में भी समाज का दर्पण ही हैं। पर्दे पर वही सब कुछ दर्शकों को परोसा जा रहा है जो समाज में घटित हो रहा है और  दर्शक इसको देखना भी पसंद करते हैं। 

       वह कहते हैं कि अच्छा अभिनेता वही बन पाता है जो करोड़ों की भीड़ में अपने लाखों चाहनेवाले बना पाता है और वह सभी अपने चेहते कलाकार को असीमित प्यार  भी करते हैं। आज राहुल जिस मुकाम पर पहुंचे हैं उसके लिए वह अपने परिश्रम के साथ -साथ दर्शकों से उनको मिले प्यार और आशीर्वाद का प्रतिफल मानते हैं। 

Thursday, 23 November 2017

पंजाबी फिल्मों का चमकता सितारा , अदभुत अभिनय क्षमता का धनी विराट महाल

               पंजाब शरू से ही संगीत और साहित्य से सम्पन्न रहा है। यहां की लोक संस्कृति और सभ्यता की पहचान यहां के किस्से -कहानियों से लेकर लोकगीतों से सहज हो जाती है। यहां की मिटटी ने एक से बढ़कर एक प्रसिद्ध कवि -शायर ,प्रेम करनेवाले प्रेमी युगलों के साथ -साथ अभिनय करनेवाले नायक और कलाकार भी पैदा किये हैं जिन्होंने भारत ही नहीं पूरी दुनिया में पंजाब की संस्कृति और लोकसंगीत का डंका बजाया और जो आज भी कायम है। जहां पंजाबी मेहनतकश और जिन्दादिल कौम तो है ही वहीं युद्धकौशल में भी अपना लोहा मनवाने में सबसे ऊपर रही है। इस जिंदादिली के साथ -साथ पंजाबियों ने संगीत और अभिनय के क्षेत्र में भी अपना परचम हमेशा से पूरी दुनिया में फहराया है। पंजाबी संगीत की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि पुराने जमाने से लेकर आज तक की भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सफर में जहां पंजाबियों का अधिपत्य जमा हुआ है वहीं हर हिंदी फ़िल्में में भी पंजाबी गीत -संगीत का तड़का लगाना सफलता का पैमाना माना जाता है। पंजाबी गीत और धुन के बिना फिल्म नीरस सी लगती है। यह पंजाबियों की संगीत के क्षेत्र में सम्पन्न विरासत का ही परिणाम है कि पंजाबी भाषा न समझनेवाले लोग भी पंजाबी गीतों और धुनों पर मस्त होकर थिरकने को विवश हो जाते हैं। 

           भारत में ब से चलचित्र का अविष्कार हुआ है और फिल्में बननी  शुरू हुई हैं और कुछ समय बाद ही पंजाबी फिल्मों निर्माण भी शरू हो गया । अब तक के फ़िल्मी इतिहास में कई नामी कलाकार ऐसे हुए जो पंजाबी अभिनय से हिंदी फिल्मों में आकर दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए हैं। पिछले कुछ समय से एक बार फिर पंजाबी फिल्मों का दौर शुरू हो गया है जिनमें पंजाबी कलाकारों ने अपनी दमदार अभिनय क्षमता से दर्शकों  के बीच अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज़ करवाई है।सजग वार्ता डॉट कॉम की ओर से अश्विनी भाटीया ने पिछले दिनों पंजाबी थियेटर के दमदार अभिनेता श्री विराट महाल से विस्तृत बातचीत की। यहां उसी बातचीत के कुछ अंश प्रस्तुत हैं ; 

 छःफूटा ऊचा -लम्बा सुन्दर चेहरे -मोहरे वाला पंजाबी गभरु विराट महाल भी  पंजाबी फिल्मों में उभरता सितारा साबित हो रहा है जिसने अपनी अभिनय क्षमता से अल्पकाल में ही लोकप्रियता के क्षेत्र अपनी खास पहचान बना ली है। पंजाब के भटिण्डा जिले के रहनेवाले विराट को भगवान ने आकर्षक चेहरा और व्यक्तित्व के साथ अदभूत अभिनय क्षमता भी प्रदान की है। पिछले 14 वर्षों के थियेटर में काम करने के अनुभव ने उनकी फिल्मों की राह भी आसान सी बना दी है। विराट को 2011 -2012 में उनकी उतकर्ष अभिनय क्षमता के लिए पटियाला यूनिवर्सिटी ने गोल्ड मेडल  से सम्मानित किया। पंजाब के ग्रामीण अंचल में जन्म लेनेवाले महाल ने पटियाला युनिवेर्सिटी से बी ए किया और थियेटर के साथ जुड गए। विराट कहते हैं कि उनका बचपन से यही सपना था कि वो अभिनय के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाएंगे और उहोने अपने सपने को साकार करने के लिए पूरी लग्न और मेहनत करनी शुरू कर दी। उसी लग्न और मेहनत के दम पर आज वो एक स्थापित  कलाकार बन चुके हैं। विराट ने अधिकांश फीचर फिल्मों में खलनायक की सशक्त भूमिका अदा की है। अभिनय के साथ -साथ पंजाब युनिवेर्सिटी से पंजाबी में एम् ए विराट को कहानी लिखने में माहिर हैं। उनकी द्वारा लिखी कहानियों पर फीचर फिल्म बन चुकी हैं जो दर्शकों को काफी पसंद आई हैं। अमरो फिल्म की कहानी का लेखन विराट ने ही किया है। विराट कहते हैं कि अब तक विराट कहते हैं कि उन्होंने अब तक जितनी फीचर फिल्मों में भी काम किया है उनमें सब में से उनको उनकी निकट भविष्य में रिलीज होनेवाली फिल्म  कच्ची पहि दा गीत  फिल्म में उनकी मास्टर जगरूप की भूमिका सबसे अधिक मन को भायी है। यह फिल्म बूटा सिंह शाद जी  की लिखी कहानी पर कान फिल्म फेस्टिवल  में प्रदर्शित करने हेतु श्री सुखवीर सिंह जी के कुशल निर्देशन में बनाई जा रही है। और इसमें प्रसिद्ध पंजाबी कलाकार निर्मल ऋषि और नगिंदर गखड़ जी  मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।  

                       विराट अभी तक कई फीचर फिल्मों में अभिनय के अलावा दूरदर्शन के लिए निर्मित टेली फिल्मों सहित टी वी के विज्ञापनौ में भी अपना महत्वपूर्ण रोल निभा चुके हैं। विराट देखने में जितने सुन्दर और आकर्षक हैं बात करने में भी उनकी वाणी उतनी ही मधुर और सौम्य है। उनकी फिल्मों में प्रमुख नाम हैं -अँखियाँ उडीक दियां ,बेस्ट फ्रेंड ,किन्ना करदे हाँ प्यार ,तवीत ,लाजो ,फौजी केहर सिंह। विराट ने बताया कि स्कूल टाइम में वो कबड्डी के खिलाडी थे और खाली समय में बच्चों का समूह बनाकर नाटक खेला करते थे। 

    विराट चाटुकारिता की बजाय अपनी मेहनत और काम के प्रति सच्ची निष्ठां को ही सफलता की कुंजी मानते हैं। वो कहते हैं कि व्यक्ति अगर ठान ले तो वो अपनी मेहनत के बल पर किसी भी मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले एक दुर्घटना में उनकी एक टाँग टूट गयी थी और दूसरी बुरी तरह से जख्मी हो गयी थी लेकिन इस समय में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी प्रबल ईच्छा के बलबूते स्वस्थ होकर फिर अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हो गए। फिल्म अँखियाँ उडीक दियां  में मुख्य भूमिका लखविंदर वडाली ने निभाई थी जिसमें विराट ने उनके मित्र के रूप में में चरित भूमिका अदा की थी और इसके निर्देशक मुकेश गौतम थे।                                                      विराट कहते हैं कि उनको  फिल्म में खलनायक या किसी रौबिले  अर्थात दबंग चरित्र पात्र के रोल को करने में ज्यादा मजा आता है। वो कहते हैं कि उनको आर्ट मूवीज ज्यादा अच्छी लगती हैं और उनकी पसंदीदा अदाकारा शबाना आज़मी और तब्बू हैं और मनोज वाजपेयी का अभिनय उनको अच्छा लगता है। उनकी यह हार्दिक इच्छा भी है कि वो इन दोनों यानि शबाना और तब्बू के साथ किसी फिल्म में काम करें। 

बातचीत के अंत में विराट ने भी अपनी दिली इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वो मुंबई जाकर हिंदी फिल्मों में काम करना चाहते हैं और इस बात की उन्हें पूरी उम्मीद ही नहीं विश्वास भी है की उनकी यह ईच्छा शीघ्र पूर्ण होगी। विराट हिन्दी के ऐसे धारावाहिक में भी काम करने के इच्छुक हैं जो राजा -महाराजा की कहानियों पर आधारित हों और उनका रोल राजसी वेश -भूषा वाला हो जो उनको बेहद पसंद है। वो आज के युवाओं को एक बात कहना नहीं भूलते कि उनको अपना लक्ष्य निर्धारित करने के उपरांत पूरी मेहनत और निष्ठा से उसको पाने के लिए संघर्ष करना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय कड़ी पर्तिस्पर्धा का जमाना है जिसमें जुगाड़ या
चाटुकारिता के दम पर नहीं अपनी कौशलता और योग्यता से ही अपने लक्ष्य को पाया और उसपर टिका रहा 
जा सकता है। वो कहते हैं कि आज पंजाब की मूल संस्कृति को आधुनिक पाश्चात्य संस्कृति निगलती जा रही है जो चिंता का विषय है। विराट यह भी कहते हैं कि शहरों की तुलना में पंजाब के ग्रामीण परिवेश में अभी भी पुराणी संस्कृति और सभ्याचार देखने को मिल जाती है जो कि संतोष की बात है।